नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र संघ ने भारत सरकार को झटका देते हुए आर्थिक वृद्घि दर की संभावना चालू वित्त वर्ष में कम कर दी है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने भारत की आर्थिक वृद्घि दर 5.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के कुछ देशों की आर्थिक वृद्घि दर में कुछ इजाफा देखने को मिल सकता है। वहीं वैश्विक आर्थिक वृद्घि दर को भी यूएनओ की ओर से पिछले साल के मुकाबले ज्यादा आंका है।
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वैश्विक आर्थिक वृद्घि दर में हो सकता है इजाफा
संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से वैश्विक आर्थक वृद्घि दर के अनुमान में इजाफा किया है। रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष में दुनिया की आर्थिक वृद्घि दर में 2.5 फीसदी रह सकती है। जबकि पिछले साल यही आर्थिक वृद्घि दर 2.5 फीसदी रही थी। वहीं यूएन ने इस संभावना को भी नहीं नकारा है कि अगर दुनिया में ट्रेड टेंशल और फाइनेंशियल अप एंड डाउंस और जियो पॉलिटकल टेंशन की वजह से मामला गड़बड़ा भी सकता है।
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भारत के बारे में क्या कहा
वहीं दूसरी ओर यूएन की रिपोर्ट में भारत के बारे में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 5.7 फीसदी रहने की संभावना है। जबकि डब्ल्यूईएसपी 2019 में इसके 7.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था। वहीं अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया जबकि पूर्व में इसके 7.4 फीसदी रहने की बात कही गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की जीडीपी वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष में 6.8 फीसदी रही थी।





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